Sunday, March 3, 2019

आतंकी सरगना की मौत

पाकिस्तान से आ रही खबरों के मुताबिक आतंकी सरगना की मौत की दो अलग-अलग वजहों का दावा किया जा रहा है।
एक ओर उसे भारतीय वायुसेना के बालाकोट हमले में गंभीर रूप से घायल होने और फिर मौत होने का दावा किया जा है, तो दूसरी ओर किडनी फेल होने या फिर लीवर कैंसर के मौत की बात कही जा रही है। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पुलवामा हमले के बाद बने दबाव से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए यह पाकिस्तान की नई चाल भी हो सकती है।
सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मसूद अजहर के बारे में पाकिस्तान से अलग-अलग तरह की सूचना आ रही है। लेकिन स्वतंत्र रूप से किसी की पुष्टि नहीं हुई है। बालाकोट में एअर स्ट्राइक के दो दिन बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मसूद अजहर के पाकिस्तान में होने और गंभीर रूप से बीमार होने का खुलासा किया था।
इससे इस आशंका को बल मिलता है कि एअर स्ट्राइक में सचमुच में आतंकी सरगना गंभीर रूप से घायल हुआ होगा। इसे सीधे तौर पर नकारा नहीं जा सकता है। वैसे एअर स्ट्राइक में मसूद अजहर की मौत से पाकिस्तान पोषित आतंकियों के मनोबल पर बुरा प्रभाव पड़ता।
शायद यही कारण है कि बाद यह खबर आनी शुरू हो गई कि अजहर मसूद का किडनी फेल हो गया है और वह डायलिसिस पर है। इसके साथ ही लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीडि़त होने की बात कही गई। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि मसूद अजहर की बीमारी और मौत की खबर पाकिस्तान की नई चाल हो सकती है। दरअसल मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया है।
माना जा रहा है कि पिछली बार की तरह इस बार शायद चीन मसूद को बचाने के लिए वीटो का इस्तेमाल करने से बचे। इसके साथ ही भारत भी पुलवामा हमले के बाद मसूद अजहर के खिलाफ साफ-साफ दिखने वाली कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ा है। ऐसे में मसूद अजहर की मौत की झूठी खबर फैलाकर पाकिस्तान एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश कर सकता है। जैश ए मोहम्मद को पहली ही पाकिस्तान ने प्रतिबंधित सूची में डाल रखा है।
अजहर मसूद की मौत के बाद उस पर कार्रवाई का दबाव भी पाकिस्तान पर से हट जाएगा। दरअसल पाकिस्तान पहले ओसामा बिन लादेन को लेकर इसी तरह का झूठ बोल चुका है। 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने जब ओसामा बिन लादेन की खोज शुरू की तो पाकिस्तान की ओर झूठ फैलाया गया कि लादेन किडनी की गंभीर बीमारी से पीडि़त है और तोरा-बोरा की पहाडि़यों में कहीं छिपा है।
अजहर के भाई अम्मार ने माना भारी नुकसान हुआपाकिस्तान भले ही हवाई हमले से कोई नुकसान नहीं होने का दावा कर रहा हो, लेकिन मौलाना मसूद के भाई मौलाना अम्मार के शनिवार को आए वीडियो क्लिप में वह कबूल कर रहा है कि भारी नुकसान हुआ है। यह वीडियो क्लिप पेशावर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम की है, जो कि भारत के हवाई हमले के बाद हुआ था।
श-ए-मोहम्मद के प्रमुख अजहर ओसामा बिन लादेन का करीबी रह चुका है, जो कई अफ्रीकी देशों में आतंक का प्रेरक रहा है और कई पाकिस्तानी मौलवियों को ब्रिटेन की मस्जिदों में धार्मिक प्रवचन के जरिए जिहाद के लिए प्रेरित किया। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। 
50 वर्षीय प्रभावशाली और मास्टरमाइंड आतंकी का प्रभाव इतना बड़ा था कि जब वह 31 दिसंबर, 1999 को कंधार में अपहृत इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को मुक्त करने के बदले में भारत द्वारा रिहा किया गया तो ओसामा बिन लादेन ने उसी रात भोज की मेजबानी की। भोज में लादेन ने याद दिलाया कि 1993 में उन्होंने और अजहर ने पहली बार एक साथ काम किया था।
अजहर को 1994 में जम्मू-कश्मीर में जिहाद का प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।  अजहर की ब्रि‍टिश भर्तियों में से आतंकी समूह हरकत-उल-अंसार (HuA) के सदस्य के रूप में उमर शेख ने उसकी रिहाई के लिए 1994 में भारत में चार पश्चिमी पर्यटकों का अपहरण कर लिया था। अजहर की रिहाई के लिए 1995 में फिर से पांच पश्चिमी पर्यटकों का अपहरण कर लिया गया और अंततः उन्‍हें भी मार डाला गया। 
अजहर की रिहाई के लगभग तुरंत बाद जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया गया और इसने अप्रैल 2000 में जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में बादामी बाग छावनी पर आत्‍मघाती हमला किया गया था। 24 वर्षीय आत्‍मघाती हमलावर आसिफ सादिक था जो अजहर की शुरुआती भर्ती और बर्मिंघम के छात्रों में से एक था।

 


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