लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को लेकर तेज हुई राजनीति के बीच जहां कांग्रेस कर्ज माफी का दांव चलने की तैयारी में है, वहीं सरकार उन रियायतों पर कदम बढ़ाने की तैयारी में है जिसका प्रभाव तत्काल दिखे।
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पिछले दस दिन में सरकार लगभग पांच बैठकें कर चुकी है और माना जा रहा है नए साल में किसानों के लिए बड़ी घोषणा हो सकती है। पूर्ण ऋण माफी भी एक विकल्प है लेकिन ज्यादा गंभीरता से मात्र एक रूपये के प्रीमियम पर फसल बीमा योजना और उपज के उचित मूल्य की गारंटी पर विचार हुआ है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में बुधवार को देर शाम तक उच्च स्तरीय बैठक चली, जिसमें कई विकल्पों पर विचार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली और कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के साथ संबंधित विभागों के आला अफसरों ने हिस्सा लिया।
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हर फैसले से खजाने पर पड़ने वाले असर को भी देखा गया। सूत्रों के मुताबिक पूर्ण कर्ज माफी में सरकारी खजाने पर 3.25 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। इस विकल्प के लागू होने की दशा में अर्थ व्यवस्था के संतुलन पर विपरीत असर पड़ने की संभावना है।
दूसरा विकल्प उपज के उचित मूल्य दिलाने की गारंटी वाला है, जिसमें किसानों को उनकी फसल की वाजिब कीमत का भुगतान करना शामिल है। सरकार ने यह फैसला बीते खरीफ सीजन के शुरू होने के पहले ही किया था। खरीफ मार्केटिंग सीजन भी समाप्त होने को है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई के लिए सरकार सभी किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से दो हजार रुपये का भुगतान कर सकती है। भुगतान की धनराशि यह आंकड़ा पिछले तीन चार सालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर के हिसाब से निकाला गया है। लोकसभा चुनाव के पहले किसानों को इस विकल्प से लाभ देने से सरकारी खजाने पर तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपये का बोझ आएगा।यह भी पढ़ें

तीसरे विकल्प के मसौदे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है, जिसमें मात्र एक रूपये के प्रीमियम पर फसल की बीमा पॉलिसी दी जा सकती है। इस प्रस्ताव से देश के किसानों की खेती जोखिम मुक्त हो जाएगी। फिलहाल इसके वास्तविक प्रीमियम का डेढ़ से पांच फीसद तक देना पड़ता है। नए फैसले से सरकार पर अधिकतम 10 हजार करोड़ रुपये केंद्र और पांच हजार करोड़ रुपये राज्यों को खजाने पर पड़ सकता है।
चौथा प्रस्ताव किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर है। फिलहाल एक लाख रुपये के कर्ज पर जमीन बंधक रखनी पड़ती है। नया मसौदा लागू किया गया तो दो लाख तक कर्ज के लिए जमीन गिरवी नहीं रखनी पड़ेगी। इससे किसानों को बैंक से कर्ज लेने में सहूलियत होगी।

पांचवा प्रस्ताव यह है कि किसानों की बढ़ती लागत में कटौती करने के लिहाज से सब्सिडी देने की योजना के तहत प्रत्येक सीजन में प्रति एकड़ के हिसाब से एकमुश्त धनराशि बैंक खाते में जमा कराई जाए। इस तरह की योजना तेलंगाना, उड़ीसा और झारखंड में चलाई जा रही है।
इसमें तेलंगाना सरकार प्रत्येक किसान को हर साल उसके बैंक खाते में 8000 रुपये जमा कराती है। जबकि उड़ीसा में हर साल प्रत्येक परिवार को पांच हजार रुपये देती है। झारखंड में किसानों के हित में चलाई गई योजना में उसके बैंक खाते में 10 हजार रुपये एकमुश्त जमा कराएगी। अगर इस तरह की योजना लागू हुई तो खजाने पर तकरीबन ढाई लाख करोड़ रुपये का भार आएगा।

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